नई दिल्ली।
भारत सरकार ने आयुर्वेदिक उत्पादों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब आयुर्वेदिक उत्पादों के लिए नए गुणवत्ता मानक तय किए गए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित, प्रमाणित और भरोसेमंद उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे।सरकार के इस निर्णय से आयुर्वेदिक उद्योग को न केवल मजबूती मिलेगी, बल्कि उत्पादन और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। नए मानकों के तहत आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, निर्माण प्रक्रिया, शुद्धता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।नए मानकों के अनुसार, आयुर्वेदिक उत्पादों में प्रयुक्त जड़ी-बूटियों, खनिजों और अन्य तत्वों की वैज्ञानिक जांच अनिवार्य होगी। इससे मिलावट और घटिया सामग्री पर रोक लगेगी और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि इन मानकों से आयुर्वेदिक उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। गुणवत्ता प्रमाणन से विदेशी बाजारों में निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, वहीं देश के भीतर उपभोक्ताओं को बेहतर और सुरक्षित उत्पाद मिलेंगे।सरकार का उद्देश्य आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों से जोड़ते हुए उसकी विश्वसनीयता और स्वीकार्यता बढ़ाना है। इससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को नई दिशा मिलेगी और आयुर्वेदिक उत्पादों की साख मजबूत होगी।कुल मिलाकर, यह फैसला आयुर्वेदिक क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार, पारदर्शिता और उपभोक्ता सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



