हाल ही में एटा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हैंड-फुट-माउथ सिंड्रोम (HFMS) वायरस तेजी से फैल रहा है। अब तक 50 से ज्यादा बच्चे संक्रमित पाए गए हैं। यह वायरस मुख्य रूप से 10 साल तक की आयु के बच्चों को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो यह संक्रमण और अधिक फैल सकता है।

HFMS क्या है?
हैंड-फुट-माउथ सिंड्रोम एक सांक्रामक वायरल बीमारी है, जो बच्चों में आम पाई जाती है। यह मुख्य रूप से Coxsackievirus और Enterovirus के कारण फैलती है। वायरस बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने का फायदा उठाकर शरीर पर तेजी से असर डालता है।
संक्रमण के शुरुआती और स्पष्ट लक्षण इस प्रकार हैं:
1. बुखार और गले में खराश
2. हाथ, पैर और मुंह में लाल दाने या छाले
3. मुंह के अंदर दर्दनाक छाले, जिससे खाने-पीने में कठिनाई होती है
4. भूख कम लगना और थकान
5. चिड़चिड़ापन और बेचैनी

HFMS कैसे फैलता है?
संक्रमित बच्चे के लार, बलगम, छींक, खांसी या फटे छालों से निकले तरल के संपर्क में आने से।
खिलौनों, कपड़ों, खाने-पीने की वस्तुओं के जरिए।
भीड़भाड़ वाले स्कूल, डे-केयर या खेल के मैदान में बच्चों के आपसी संपर्क से।
बचाव के उपाय
1. संक्रमित बच्चे को अलग रखें ताकि यह वायरस दूसरों तक न फैले।
2. हाथ धोने की आदत डालें – साबुन और पानी से दिन में कई बार।
2. हाथ धोने की आदत डालें – साबुन और पानी से दिन में कई बार।
3. बच्चों के खिलौने, बर्तन, बोतलें और कपड़े साफ रखें।
4. बच्चों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचें।
5. स्कूल प्रशासन और अभिभावक मिलकर निगरानी रखें कि किसी बच्चे में लक्षण दिखें तो तुरंत इलाज मिले।
इलाज क्या है?
HFMS का कोई खास टीका या दवा नहीं है। यह संक्रमण आमतौर पर 7 से 10 दिन में अपने आप ठीक हो जाता है।
डॉक्टर सामान्यत: बुखार और दर्द कम करने की दवा देते हैं।
बच्चे को हल्का और ठंडा खाना दें ताकि छालों में आराम मिले।
पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ (पानी, जूस, सूप) दें।
–फुट-माउथ सिंड्रोम भले ही जानलेवा न हो, लेकिन बच्चों में यह काफी तेजी से फैलता है और तकलीफदेह हो सकता है। समय पर पहचान, बच्चों को अलग रखना और साफ-सफाई ही इसके प्रसार को रोकने का सबसे बड़ा उपाय है।
अभिभावकों और स्कूलों को सतर्क रहकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।



