“अब खैर नहीं… जनता पर हाथ उठाया तो कानून उठेगा पुलिस पर!”

भारत के संविधान और कानून में पुलिस को जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन जब यही पुलिस अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करती है और आम आदमी पर अनुचित बल प्रयोग या मारपीट करती है, तो यह अपराध माना जाता है।
भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) की धारा 115 स्पष्ट कहती है कि “स्वेच्छा से चोट पहुँचाना अपराध है” – और यह नियम पुलिस पर भी उतना ही लागू होता है जितना किसी आम नागरिक पर।
धारा 115 BNS क्या कहती है?

यदि कोई व्यक्ति (चाहे वह पुलिसकर्मी ही क्यों न हो) जानबूझकर या अनुचित रूप से चोट पहुँचाता है, तो यह अपराध है।
इस अपराध के लिए हो सकती है:
एक साल तक की कैद, या
दस हज़ार रुपए तक का जुर्माना, या
दोनों।
पुलिस पर यह कैसे लागू होता है?
यह अपराध जमानती है और गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable) है।
1. ड्यूटी के दौरान उचित बल – अगर पुलिस अपराधी को पकड़ने में आवश्यक और वैध बल का प्रयोग करती है, तो वह अपराध नहीं माना जाएगा।
2. शक्ति का दुरुपयोग – लेकिन यदि पुलिस अपनी शक्ति से आगे बढ़कर अनावश्यक पिटाई करे, चोट पहुँचाए, या उत्पीड़न करे – तो यह धारा 115 के तहत अपराध होगा।
आम आदमी पुलिस पर केस कैसे दर्ज कर सकता है?
1. एफआईआर (FIR) दर्ज करना सीधे थाने में पुलिस के खिलाफ FIR दर्ज कराना मुश्किल हो सकता है।लेकिन पीड़ित व्यक्ति वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (SP या DIG) के पास लिखित शिकायत दे सकता है।
2. मैजिस्ट्रेट के पास शिकायत
दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 156(3) के तहत मैजिस्ट्रेट से अनुरोध किया जा सकता है कि पुलिस पर FIR दर्ज की जाए।मैजिस्ट्रेट आदेश देगा तो संबंधित पुलिसकर्मी पर केस दर्ज करना अनिवार्य होगा।
3. मानवाधिकार आयोग में शिकायत
राष्ट्रीय या राज्य मानवाधिकार आयोग (NHRC/SHRC) में सीधे शिकायत की जा सकती है।यह प्रक्रिया तेज़ और प्रभावी होती है।
4. न्यायालय में निजी आपराधिक शिकायत
पीड़ित व्यक्ति सीधे कोर्ट में Private Criminal Complaint दाखिल कर सकता है।इसमें कोर्ट खुद संज्ञान लेकर पुलिसकर्मी को तलब कर सकता है।
आम आदमी के लिए सुझाव
यदि पुलिस मारपीट करे तो तुरंत मेडिकल रिपोर्ट (MLC) बनवाएँ।घटना का वीडियो/ऑडियो सबूत इकट्ठा करें। दो गवाह हों तो शिकायत और मजबूत होगी। शिकायत लिखित में दें और उसकी रसीद/प्राप्ति जरूर लें।
कानून सबके लिए समान है। पुलिसकर्मी को विशेष अधिकार जरूर हैं, लेकिन वे असीमित नहीं। अगर पुलिस अपनी हद से बाहर जाकर आम आदमी को चोट पहुँचाती है, तो उस पर भी वही कानून लागू होगा जो किसी नागरिक पर होता है।
याद रखिए —अपने अधिकार उपयोग प्रति हमेशा सजग रहे और लोगों को भी जागरूक बनाएं



