आज के समय में पालतू कुत्ते केवल सुरक्षा का साधन नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन पालतू जानवर रखने के साथ कुछ कानूनी और सामाजिक ज़िम्मेदारियाँ भी जुड़ी होती हैं। इन्हीं में से एक है — नगर निगम में कुत्तों का रजिस्ट्रेशन करवाना।
⚖️ कानून की दृष्टि से आवश्यक
अधिकांश नगर निगमों में पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन कानूनी रूप से अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करता है कि शहर में कितने पालतू कुत्ते हैं और उनकी सेहत व सुरक्षा पर प्रशासन की निगरानी बनी रहे।
溺 पहचान और सुरक्षा
यदि किसी कुत्ते का रजिस्ट्रेशन नंबर और टैग होता है, तो उसके खो जाने या चोरी होने की स्थिति में पहचान करना आसान हो जाता है। यह लाइसेंस एक तरह से कुत्ते की पहचान-पत्र की तरह काम करता है।
स्वास्थ्य और टीकाकरण नियंत्रण
रजिस्ट्रेशन के समय टीकाकरण (Vaccination) का प्रमाणपत्र देना अनिवार्य होता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि शहर में कोई भी बिना टीका लगाया कुत्ता घूम न रहा हो, जिससे रेबीज़ जैसी बीमारियों पर नियंत्रण रहता है।
स्वच्छता और अनुशासन
नगर निगम रजिस्ट्रेशन के माध्यम से यह भी सुनिश्चित करता है कि पालतू कुत्तों को सड़क पर खुले में न छोड़ा जाए और मालिक अपने पालतू की सफाई और नियंत्रण की ज़िम्मेदारी लें। इससे शहर की स्वच्छता और नागरिक अनुशासन दोनों में सुधार होता है।
अप्रिय घटनाओं में जिम्मेदारी तय
कई बार पालतू कुत्तों के काटने या डराने की घटनाएँ सामने आती हैं। यदि कुत्ता रजिस्टर्ड है तो निगम या पुलिस के लिए यह पता लगाना आसान हो जाता है कि उसका मालिक कौन है। इससे कानूनी कार्रवाई और जवाबदेही तय होती है।



