रुद्रपुर में भाजपा पार्षद के भतीजे की बाइक सीज होने के बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कानून नेताओं और आम आदमी के लिए अलग-अलग क्यों नजर आता है। आम जनता का चालान कटता है तो वह जुर्माना भरकर चुपचाप घर लौट जाती है, लेकिन जब बात नेताओं या उनके परिवारजनों की आती है तो सड़क पर हंगामा खड़ा कर दिया जाता है।
भाजपा पार्षद अपने भतीजे को कानून का पालन करने की नसीहत देने की बजाय खुद धरने पर बैठ गए। इस दौरान शहर के मेयर विकास शर्मा भी मौके पर पहुँच गए। सवाल यह है कि आखिर क्यों कानून की कसौटी पर नेताओं का व्यवहार अलग दिखता है?
यदि कानून का पालन हर नागरिक का कर्तव्य है, तो नेता भी उससे ऊपर नहीं हो सकते। जनता उम्मीद करती है कि जो लोग कानून बनाने का काम करते हैं, वे सबसे पहले खुद उसका पालन करें।
यह घटना केवल एक बाइक सीज होने की नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों की है। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, तभी जनता में भरोसा कायम रहेगा। नेतागिरी दिखाने की बजाय नेताओं को यह संदेश देना चाहिए कि वे खुद कानून के पालन में सबसे आगे हैं।



