नेपाल में अराजक हालात और जेलों पर हमले
नेपाल इस समय गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट से जूझ रहा है। हाल ही में उभरे “जेन.जी आंदोलन” ने पूरे देश में हिंसक विरोध प्रदर्शनों का रूप ले लिया। सरकारी संस्थानों पर हमले, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं ने अराजकता फैला दी। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा।
इस उथल-पुथल के बीच देश की कई जेलों पर भी हमले हुए। सुरक्षाकर्मियों को बंधक बनाकर और हथियार लूटकर सैकड़ों कैदी फरार हो गए। नेपाल आर्मी को जेलों के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा तैनात करनी पड़ी, वहीं कई जिलों में कर्फ्यू जैसी स्थिति लागू करनी पड़ी। इसके बावजूद हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं हैं।
खुली सीमा भारत के लिए चुनौती
भारत और नेपाल के बीच लगभग 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से लगी हुई है।
यह सीमा अतीत में भी मानव तस्करी, अवैध व्यापार और अपराधियों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल होती रही है। नेपाल में जेलों पर हमले के बाद बड़ी संख्या में फरार कैदियों के भारत की ओर रुख करने की आशंका जताई जा रही है।
एसएसबी की सक्रियता और 35 कैदी गिरफ्तार

सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 35 फरार कैदियों को गिरफ्तार किया है, जो नेपाल से अवैध तरीके से भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे।
उत्तर प्रदेश सीमा से: 22 कैदी
बिहार सीमा से: 10 कैदी
पश्चिम बंगाल सीमा से: 3 कैदी



